हिमाचली Hemp Pullan (पुलें) – परंपरा, और आराम पहाड़ियों की चप्पल

 हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में ठन्डे मौसम की पहचान सिर्फ बर्फ़-पहाड़ और कांगड़ी टोपी तक सीमित नहीं है, बल्कि वहाँ की पारंपरिक lifestyle का एक अहम हिस्सा हैं — पुलें (Pullan / Pulla)

ये हैं पारंपरिक hemp (भांग रेशा) से बनी indoor slippers, जो न सिर्फ़ पहाड़ी घरों में सिर्फ आराम के लिए पहनी जाती हैं, बल्कि धार्मिक स्थलों और मंदिरों में भी इनका विशेष महत्व है


                                                     

            
🌱 1. क्या हैं हिमाचली पुलें?

“Hemp Pullan” एक तरह की natural hemp fabric indoor slipper हैं — जिनका इस्तेमाल हिमाचल में सदियों से होता आया है।
ये traditional Himachali style slippers हैं जो comfortable, ** breathable** तथा everyday use के लिए उपयुक्त हैं।
इनके हल्के और आरामदायक डिज़ाइन की वजह से इन्हें घर, मंदिर, बगीचे या रसोई — कहीं भी आसानी से पहना जा सकता है।


🧶 2. पारंपरिक डिज़ाइन और हाथ से तैयार

ये स्लिपर्स संपूर्ण रूप से हस्तनिर्मित (handmade) होते हैं और हिमाचल के स्थानीय कारीगरों की बुनाई कला से बनाए जाते हैं।
हरा रंग का Hemp fabric न सिर्फ़ natural look देता है, बल्कि पैरों को भी सर्दी-गर्मी से अच्छा संरक्षण प्रदान करता है।
जैसे-जैसे आपका पैर इनमें “set” होता है, ये बेहद आरामदायक महसूस होने लगते हैं।

👉 यही कारण है कि इन पुलों का आराम कई आधुनिक slides/flip-flops से कहीं ज़्यादा होता है।


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🏠 3. आराम और उपयोगिता

ये slippers:

✔️ घर के अंदर (indoor) पहनी जा सकती हैं
✔️ Temple wear यानी मंदिर जाते वक्त भी उपयुक्त मानी जाती हैं
✔️ kitchen, garden आदि में आराम से उपयोग में लाई जा सकती हैं
✔️ flat heel और soft fabric की वजह से पैरों पर बोझ नहीं डालती

इनकी हल्की बनावट की वजह से लंबे समय तक उपयोग में रखे जाने पर भी पैरों में थकान नहीं होती।


🛕 4. धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

पुलें का एक खास सांस्कृतिक मतलब भी है — हिमाचल में इन्हें “pure / शुद्ध” माना जाता है।
ऐसा भी एक उदाहरण सामने आया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काशी विश्वनाथ मंदिर के पुजारियों के लिए हिमाचली hemp pulla (hemp slippers) खरीदे थे, क्योंकि मंदिर में साधारण जूते-चप्पल पहनना मना है और पुजारियों को ठंडी में पैरों की सुरक्षा चाहिए थी। 

उनके आफ़िस से दो women Self-Help Groups (SHGs) को लगभग ₹12,000 का भुगतान किया गया ताकि वे मंदिर में उपयोग के लिए Himachali Pullan तैयार कर सकें।
यह घटना इस बात को दर्शाती है कि हिमाचली पुलें की मांग न सिर्फ स्थानीय उपयोग के लिए है, बल्कि धार्मिक स्थानों पर भी इनका सम्मान है। 


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🧵 5. प्राकृतिक सामग्री, eco-friendly और टिकाऊ

ये pullan:

🌿 पूर्णतः hemp fabric से बनी होती हैं
🌿 Plastic-free और environment-friendly होती हैं
🌿 अधिक समय तक चलने वाली बनावट रखती हैं
🌿 पैरों को breathable experience देती हैं

इतनी natural चीज़ को तैयार करने में न तो कुचले रसायन का उपयोग होता है, न ही कोई harmful chemical। इसका मतलब ये कि सर्दियों में भी आराम के साथ पैरों की सेहत सुरक्षित रहती है


👩‍🌾 6. स्थानीय कारीगरों को समर्थन

ये पुलें सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि हिमाचली कारीगरों और महिला श्रमिकों के लिए रोज़गार का साधन भी हैं
बहुत-सी महिला groups इन्हें घर बैठे hand-knit करके तैयार करती हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है और पारंपरिक हुनर आगे बढ़ता है।


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🧠 क्यों खरीदें ये Himachali Hemp Pullan?

Natural और breathable material
✅ Indoor और temple दोनों के लिए उपयुक्त
✅ आरामदायक फिट और traditional look
✅ स्थानीय समुदाय और कारीगरों को समर्थन
✅ eco-friendly और टिकाऊ

इन pullen का उपयोग सिर्फ पहाड़ों के लोगों तक सीमित नहीं रहा — देश के बड़े धार्मिक स्थलों पर भी इन्हें इस्तेमाल या सम्मान के तौर पर चुना गया है, इसीलिए ये एक unique cultural souvenir भी बन चुकी हैं।

अब आपको इन पुलों के लिए पहाड़ो में जाने की कोई जरूरत नहीं। आप इन पुलों को आसानी से घर बैठे मंगवा सकते हैं , ये रहा लिंक 👇 यहाँ से खरीदें 

                                                             


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