हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की हरियाली भरी घाटी में, धौलाधार पर्वतमाला की तलहटी में बसे दो छोटे-से गांव — गरली और परागपुर — आज भी अपने भीतर एक समृद्ध इतिहास, संस्कृति और विरासत को समेटे हुए हैं। ये गांव सिर्फ पुराने मकानों या शांत गलियों के लिए ही नहीं जाने जाते, बल्कि इन्हें भारत के पहले हेरिटेज विलेज के रूप में भी पहचान मिली है।
गरली-परागपुर का ऐतिहासिक सफर
परागपुर का इतिहास कई सदियों पुराना माना जाता है। वर्ष 1997 में परागपुर को और बाद में गरली को हेरिटेज विलेज घोषित किया गया, ताकि यहां की पुरानी वास्तुकला और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित किया जा सके। इन गांवों में आज भी पत्थर, लकड़ी और चूने से बनी इमारतें, संकरी गलियां और पुराने कुएं उस दौर की जीवनशैली की झलक दिखाते हैं।
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सूद और महाजन समुदाय की अहम भूमिका
गरली-परागपुर की भव्य हवेलियों और विशाल मकानों के पीछे एक खास कहानी छिपी है। उन्नीसवीं सदी में यहां सूद और महाजन समुदाय के संपन्न व्यापारी आकर बसे थे। ये लोग व्यापार, साहूकारी और अन्य व्यवसायों से जुड़े थे और आर्थिक रूप से काफी मजबूत थे।
इन्हीं परिवारों ने गांवों में शानदार हवेलियां, कोठियां, सराय, मंदिर और सार्वजनिक भवन बनवाए। इन इमारतों की खास बात यह है कि इनमें स्थानीय पहाड़ी शैली के साथ-साथ ब्रिटिश और यूरोपीय वास्तुकला का भी प्रभाव देखने को मिलता है। ऊंची छतें, चौड़े बरामदे, सुंदर खिड़कियां और मजबूत पत्थर की दीवारें आज भी उस दौर की समृद्धि की कहानी सुनाती हैं।
फिर क्यों सूने हो गए ये मकान
समय के साथ हालात बदले। शिक्षा, रोजगार और बेहतर सुविधाओं की तलाश में इन परिवारों की अगली पीढ़ियां शिमला, चंडीगढ़, दिल्ली और विदेशों में बस गईं। धीरे-धीरे गांव खाली होते चले गए और कई हवेलियां बंद, जर्जर या वीरान हो गईं।
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हालांकि आज भी कुछ परिवार अपने पैतृक घरों से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं। कुछ हवेलियों को फिर से संवार कर हेरिटेज होटल और होमस्टे में बदला गया है, जैसे गरली की प्रसिद्ध Chateau Garli और परागपुर का Judge’s Court, जो अब पर्यटन को नया जीवन दे रहे हैं।
फिल्मों और शूटिंग की पसंदीदा जगह
गरली-परागपुर की पुरानी गलियां, हवेलियां और शांत वातावरण फिल्मकारों को लंबे समय से आकर्षित करता रहा है। यहां बॉलीवुड, पंजाबी फिल्मों, म्यूजिक वीडियो और विज्ञापनों की शूटिंग होती रही है और आज भी होती है। गांव का पुराना भारत वाला माहौल कैमरे के लिए एकदम प्राकृतिक सेट जैसा लगता है, इसलिए कई निर्देशक यहां शूटिंग के लिए आते हैं।
आज का गरली-परागपुर
आज गरली-परागपुर एक ऐसा स्थान है जहां इतिहास, शांति और ग्रामीण जीवन एक साथ दिखाई देते हैं। हालांकि कई इमारतें संरक्षण की कमी से जूझ रही हैं, लेकिन सरकार और स्थानीय लोग इन्हें बचाने की कोशिश कर रहे हैं। सौंदर्यीकरण योजनाएं, बुनियादी सुविधाओं का विकास और पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयास जारी हैं।
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यह गांव उन यात्रियों के लिए खास है जो भीड़-भाड़ से दूर, असली हिमाचल को महसूस करना चाहते हैं — जहां हर दीवार, हर हवेली और हर गली के पीछे एक कहानी छिपी है।
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कब और कैसे जाएं
गरली-परागपुर साल भर घूमने के लिए उपयुक्त है, लेकिन बसंत और शरद ऋतु में इसका सौंदर्य और भी निखर जाता है। यह स्थान सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है और कांगड़ा घाटी के अन्य पर्यटन स्थलों के साथ जोड़ा जा सकता है।

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